Hymn No. 464 | Date: 08-Nov-1998
सद्गुरू देव बहा लें जा तू हमें अपने प्यार में बहतें बहतें मिट जायेगा अस्तित्व हमारा ।
सद्गुरू देव बहा लें जा तू हमें अपने प्यार में बहतें बहतें मिट जायेगा अस्तित्व हमारा ।
प्यार का इक् कब बन गया जो तन – मन हमारा, उठतीं हुयीं तरंगो में झुमां करेंगे डूबके आनंद में।
कोई ना होगा वहीं, चारों और प्यार ही प्यार होगा, प्यार की मौजों में उबकें उतरायेंगे हम।
ना कर्म होगा, ना धर्म होगा, प्यार की सीमा की भी सीमा ना होगी, असीम प्यार में ना रूकना ना बहना होगा।
ना गुण होगे, ना अवगुण होगे, सर्वत्र प्यार ही प्यार होगा, तेरी मेरी कुद पहचान ना होगी।
प्यार का ज्वार प्यार से ही टकरायेंगा, जो कुछ पास आयेंगा प्यार में प्यार बनकें डूबता चला जायेगा।
हालत बूरी ना अच्छीं होगी, निजआनंद सच्चिदानंद झूमतें हुये प्यार में बहतें रहेगे हम ।
कहना ना होगा, ना मन में कोई बात होगी, प्यार की तरंग उठेंगी प्यार में झुमेंगे, प्यार ही प्यार होगा।
जुडना अलग होना कुछ ना हागा, प्यार होके प्यार ना होगा शुन्स से उपजा हुआ सब कूछ शुन्य में होगा।
तेरा बनकें भी बनना ना होगा, जुदा कब हुये थें की खुशीयाँ मनायें पानें की, परम् तेरे अविभाज्य अंग है हम।
- डॉ.संतोष सिंह
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