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Hymn No. 467 | Date: 10-Nov-1998
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पागल मैं इस संसार में सबसे बडा, जिसकें लिये लोग दुनिया से है भागतें ।
पागल मैं इस संसार में सबसे बडा, जिसकें लिये लोग दुनिया से है भागतें ।
उसकी कृपा थी हमपे इतनी बैठें – बैठें, इस संसार में मिल गया वो हमें ।
मन के हर चक्रव्यूह को तोड़ना सीखा दिया दिल के बाणों से ।
अमीर होगा कोई कीतना इस नश्वर साम्राज्य में, शाश्वत साम्राज्य का धनी बनना सीखा दिया।
बनता – बिगडता है लोगों की दुनिया में, जहाँ सिर्फ है बनना ऐसी दुनिया दिखा दिया।
अकूत दौलत है फीकी दिल की दौलत कें आगे, इसे जिसनें पाया सब कूछ लुटाकें बौराया।
परम के साम्राज्य के अभेद अंग है हम, हर अनुकूल है हमारें।
दया पे उसकें जीतें है, कीड़े – मकोडाsं की जिंदगी को त्याग कें उसका स्वरूप पातें है ।
दिल तो प्यार करता है उससे सदा, मन भागता है संसार में उसकें ।
समय रहतें चेत नहीं पातें, जन्म और मृत्यु के चक्कर में बंधे रह जातें है हम।
- डॉ.संतोष सिंह
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खाब देखते रहतें है अनेक हम, सच्चाई से रूबरू होनें पे घबरा जाते है।
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मन की तीव्रता में सब कूछ बह जाता है, पछतानें से कूछ ना होता।
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