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Hymn No. 476 | Date: 13-Nov-1998
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होश में ना रहना हूँ चाहता, छाया रहे मुझपे आलम तेंरा । जो होना होगा देखा जायेगा, परवाह ना है मुणे कीसीकी । कीस बात की फिकर करूं मैं, जो हो रहा है तेरी मर्जी से ।
होश में ना रहना हूँ चाहता, छाया रहे मुझपे आलम तेंरा ।

जो होना होगा देखा जायेगा, परवाह ना है मुणे कीसीकी ।

कीस बात की फिकर करूं मैं, जो हो रहा है तेरी मर्जी से ।

जो मेरा हो कहलाता मुझें ना है गंवारा, हम तो हो चुके है तेरे ।

आबाद कोई क्या करेंगा, हमनें जो थांम रखीं है तेरी उंगली ।

बरबाद क्यों कर होनें लगा, जो सहारा मिल गया है तुझसे ।

हवा हो चुकीं है हर बात वो जो पहुंचाती थीं दिल को दुःख।

खुशीं कर कीसी वक्त क्यों मनाना, जब हो खुशी हर पल चित में ।

प्रभु क्याँ पाऊँ, क्याँ खोऊँ, हम तो जुड गये है जो तुझसे।

कीस बात पे रोऊँ या हंसु, तू कीस हॉल में रखें उस हाल को अपना लें हम ।


- डॉ.संतोष सिंह