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Hymn No. 479 | Date: 15-Nov-1998
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प्यार का जाम पीतें रहे प्रभु तेरा नाम लेतें रहे ।
प्यार का जाम पीतें रहे प्रभु तेरा नाम लेतें रहे ।
प्यार ही प्यार तुझसे करें, यह अनेकों अनेक बार तुझसे करें ।
रोकें कोई लाख हमें, उतना ही जोर प्यार का चलें हमपे।
खुद भी बहें प्यार में, तूझे भी बहातें चलें प्यार में।
हर गम प्यार की याद दीलायें, तेरे मेरे प्यार में गम दम तोड़ जाये।
चार दिन की खुशी लेकें क्या करूंगा, हम तो तेरे शाश्वत् प्यार में रहना चाहें ।
प्यार की डगर मिलें, चलें हम उसपे प्यार से प्यार के मुलाकात के वास्ते ।
प्यार में जीना हो, तेरे प्यार में मिटना हो।
वो सब कूछ छुट जाये जिनका वास्ता प्यार से ना हो।
हर रिश्ते को बदलता है प्यार, दुश्मन – दोस्त बनतें है प्यार में ।
हम हम ना रहना चाहते है, अपने प्यार के लिये प्यार में ढल जान चाहते है ।


- डॉ.संतोष सिंह