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Hymn No. 480 | Date: 16-Nov-1998
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तेरे चरण परवारू आजीवन बनकें तेरा दास गुजांरू जीवन का हर पल।
तेरे चरण परवारू आजीवन बनकें तेरा दास गुजांरू जीवन का हर पल।

ना कोई आश हो तुझसे, ना निराश होऊँ, तेरी सेवा हल करता रहूं तन मन से ।

चुपकें चुपके प्यार करूंगा में तुझसे, कानोंकान खबर ना होने दूंगा कीसीको।

ख्यालों में तेरे संग रहनें का सपना संजोया हूँ, साकार करेंगे चाकरी यें तेरे ।

हर साध पुरीं होगी मेरी, तेरी सेवा करते हूयें दीदार तेरा करेंगे हम।

जनमों जनम के बंधन को तोड़कें, बन जाऊँ तेरे चरणों की धूली।

तेंरा हर कार्य करेंगे हम निमग्न होके तुझमें, कोई सवाल ना करेंगे तुझसे ।

अपने प्यार को प्रकट ना होने दूंगा कीसीपे, गैरों की बात छोड हम तो तूझपे भी प्रकट ना होने देंगे।

मिलन की चाह ना है मुझे, दिल ही दिल में मिलन होता है तुझसे ।

मेरा प्यार उमडता – घूमडता रहेगा दिल में, नजरों से ना कभी बरसनें दूंगा।

मौंन होगा प्यार मेरा, शब्दों में साकार ना कभी होनें दूंगा।


- डॉ.संतोष सिंह