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Hymn No. 485 | Date: 18-Nov-1998
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खिल उठें है प्यार का फूल हमारें दिलों में, कर दें तू कृपा हमपे इतनी।
खिल उठें है प्यार का फूल हमारें दिलों में, कर दें तू कृपा हमपे इतनी।
गुलजार है तुझसे यें चमन सारा, उमंगों से भर जायेगा जीवन हमारा।
सब कूछ चैतन्य है तुझसे, शक्ति तू एक है तुझमें समाया है सब कूछ।
रमता है तू सारे संसार में, तेरी दया बिन् कोई पहचान नहीं पाता तूझे।
सिमटें हुये है हम तन की सीमाओं में, मन की शक्ति को जान नहीं पातें ।
प्रज्वलित कर दें तू हमारें मन के भीतर छिपे ज्ञान के दीप को।
फैलेगा उजास उसका चारों ओर, आंखो पे छाया कुहासा मिटता चला जायेगा।
दिलों – दिमाग का साथ होगा, जीवन रथ सुचारू रूप से तेरी और बढता जायेगा।
मिटेंगी हमारी काया गम ना करेंगे, दम होगा जब तक लयबध्द होके बड़ेंगे तेरी और ।
रोम – रोम से झंकार उठेंगी, तेरे नाम की गुंज चारों और होगी।


- डॉ.संतोष सिंह