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Hymn No. 487 | Date: 19-Nov-1998
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मैं तेरा चरण, बैठें – ठालें गाता हूँ तेरे गीतों को ।
मैं तेरा चरण, बैठें – ठालें गाता हूँ तेरे गीतों को ।
एक ही कोशीश है मेंरी, खुश कर दूं मैं कीतना तूझे।
कोई उद्देश्य है अंतरमना में, बेपरवाह हूँ मैं उससे ।
मेंरी याचना एक ही है, क्याँ करकें तूझें खुश कर दूं मैं कीतना ।
तूझे खुश करनें के लिये मैं तुझसे ही मिन्नत करता हूँ ।
मेरे बस की बात जो ना है, उसे भी करनें को हूँ तैयार मैं।
नाराज कोई होता है, मेरे इस प्रयत्न से।
जो भी देगा वो सजा – झेलकें, तूझे खुश करनें में लग जाऊँगा।
भांति – भांति करतब दिखाकें, टेड़े – मेड़े गीतों को गाकें ।
जिस क्षेत्र में कुछ ना आता हो, तेरे नाम लेकें प्रवेश कर जाऊँ।
एक ही ध्येय है मेरे इस जीवन का तूझे खुश रखना।
करना पड़ेगा कोई भी कार्य करूंगा में खुशी से ।
प्रभु पर तू खुश रहना, नाराज होना पड़े तो हो लेना मुझपे।
प्रभू तू खुश रहना, प्रभु तू खुश रहना।


- डॉ.संतोष सिंह