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Hymn No. 488 | Date: 19-Nov-1998
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मेरे प्रभु तू जाने सब कुछ, बतायें कुछ ना कीसी को।
मेरे प्रभु तू जाने सब कुछ, बतायें कुछ ना कीसी को।
मेरे जैसे मुरख जानतें ना कूछ बताते है सबको हम जानते है सब कूछ।
हंसता होगा तू हमारी अल्प बुध्दि पे हमारी क्षुद्र हरकतों को देखकें ।
इतना सब कूछ सहकें, तू आनें देता है सान्निध्य में अपने।
कीतना तू विशाल ह्रदय वाला है पड़ जाता है पाला तेरा हम जैसे तूच्छ लोगों से।
तेरा दिल एक हीं है बाहर और भीतर से।
मन और दिल हमारा बस काला ही काला है ।
निराला तुझसा कोई नहीं अच्छा – बूरा जानतें हुये तू गलें लगाता है हम सबको।
देतें है तूझें अपने वचनों को कई - कई बार बिना मांगे।
बिन संकोच कीयें क्षण भरकी देर में तोड़ देतें है।
दया करकें तू सीखा दें हमें चलना तेरे बतायें राहू पे।
सब कूछ सहकें निभाना सीख जाये तूझे दियें वचनें को।


- डॉ.संतोष सिंह