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Hymn No. 489 | Date: 20-Nov-1998
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छोटा बडा कुछ ना होता है, सब प्रभु के होते है ।
छोटा बडा कुछ ना होता है, सब प्रभु के होते है ।
झूठ और सच दिमागी उपज है, हित ही श्रेयस्कर है ।
जाती – धर्म प्रभू को पानें की अवस्था है, गुजरना होता है हर इक् को।
प्रेम यह सर्वव्यापक है, तोड देती हर परंपरा को।
इससे ताकतवर कोई भी नहीं सदीयों से रीझाया है प्रभु को।
ज्ञान की सीमा अपरीमीत है प्रभु कृपा से।
भाव व्यग्रता पैदा करता है दिल में तडपाता है मिलन के लिये।
मन है अति तीव्र बिना साधे इसे हम कुछ पा नहीं सकतें ।
इंद्रियों की है सीमा, अच्छे – बुरें में करती है समर्पण।
आत्मबल ना झुकता कीसी के आगे, अगर प्यार करता है प्रभु से।


- डॉ.संतोष सिंह