VIEW HYMN

Hymn No. 490 | Date: 21-Nov-1998
Text Size
जाम का नशा जल्दी चढकें जलदी उतर जाता है ।
जाम का नशा जल्दी चढकें जलदी उतर जाता है ।
तेरे नाम का नशा देर से चढता फिर ना उतरता कभी।
रात बीततें हर बात पुरानी पढ जाती है ।
तेरी – मेरी यारी का हर पल जवां होता जाता है।
दुनिया में बहुत कुछ है ऐसा जो ललचाता है मुझको।
पर तेरे गीतो से छलकतें हुये नाम पीनें का कुछ और है मजा।
खुशीयों में आनंद आकें भी आनंद ना आता है हमें।
तेरा संग पाते ही यूं ही हर पल आनंदमय हो जाता है।
हाथ पसारें गुहार में लगाऊँ तुझसे तूझे पानें के लिये।
सब अर्पण करकें तूझे, खूद भी लिपट जान चाहता हूँ तुझसे।


- डॉ.संतोष सिंह