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Hymn No. 492 | Date: 23-Nov-1998
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कमजोर मन वाले है हम, बतायें हुये तेरे राहो से भटकते है ।
कमजोर मन वाले है हम, बतायें हुये तेरे राहो से भटकते है ।
कृपा करना तू हमपे सदा, तेरे राह से च्युत ना होनें पायें हम ।
जगत के व्यवहार को निभातें हुये, विषयों में लिप्त ना हो हम ।
तन हमारा क्षीण हो जाये, दिल में हमारें तेरे प्रीत का दीप जलता रहे।
तुझसे दूर हो हम कीतना भी, विश्वास रहे हमारा गहरा तूझपे।
चांद और सुरज मिट जाये, मेरे मन से तेरी श्रध्दा मिटें ना कभी।
क्षणभंगुर जगत से कुछ ना है आशा, सब कूछ तू है हमारा।
सुपात्र तो मैं नहीं, इस कुपात्र को तू जिसमें चाहें है बदल सकता।
वासनामय जीवन को त्साग दूंगा, लगन मेरी बडती जाये हर पल तेरे प्रती।
आसान ना है तूझे पाना, पानें के लिये तन के बंधन को मिटा देंगे हम।


- डॉ.संतोष सिंह