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Hymn No. 494 | Date: 24-Nov-1998
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दुखी ना हूँ मैं कीसी बात से, मैं हर क्षण खुश रहना हूँ चाहता।
दुखी ना हूँ मैं कीसी बात से, मैं हर क्षण खुश रहना हूँ चाहता।
फरियाद करता है मन मेरा तुझसे, दिल हमेंशा तूझे याद करता है ।
मेरे कई संपनों में संजोता हुँ तूझे, तेरा संग पानें के लिये हूँ तडपता।
मेरा दिल तडपता है तेरे करीब आनें के लिये, इस जीवन की गुत्थियाँ सुलझाने के लिये।
बहुत कुछ दिया है तूने मुझे अब स्वीकार कर लें इस तूच्छ का जीवन।
मन्नत तुझसे ना हूँ मांगता, तेरी जन्नत के लिये, तेरे चरण रज सर्वस्व है मेरे लिये।
अपने दुखों का रोना ना हूँ मैं कीसी से रोता, तेरे नाम के सिवाय मुझे कुछ ना है पता।
सताता कोई ना है कीसी को, कमजोर है हम जो मन के आगे नतमस्तक हो जातें ।
शुरूआत में हम प्रभु कहाँ थे, अब तेरी कृपा से तेरे दर पे आ गये ।


- डॉ.संतोष सिंह