VIEW HYMN

Hymn No. 495 | Date: 25-Nov-1998
Text Size
उमड - घुमड रहे है प्रीत के बादल दिल में, याद आतें ही तेरी बरस पड़ते है ।
उमड - घुमड रहे है प्रीत के बादल दिल में, याद आतें ही तेरी बरस पड़ते है ।
रोकें ना रूकतें है, मन के तूफां के संग बहते हुये समर्पण कर देना चाहते है तेरे चरणों में ।
भाव के जोर से वृंद बनकें उभर जातें है, सुनतें हुये तेरे गीतों को ।
अस्तित्व में ना रहतें कभी तेरी कृपा से अस्तित्व पातें है मिलन के लिये ।
जनमों – जनम के हर कर्मों को धो देते है, अपने निर्मल निश्चल गुणों से ।
करूणामय स्वरूप होता है इनका, हर दिल को भेद जातें है।
हर पुकार सच्चीं हो जात है उभरतें ही इनकें अस्तित्व में आकें अस्तित्वहीन कर देते है तनको
सच्चा नाता तो इनका सिर्फ तुझसे है, तुझमें भावविभोर होते ही वह निकलते है ।
वास करतें है दिल में, नजरों में नजर आतें ही तेरा दर्शन करा देतें है दिल को।
जिनका है इनसे सच्चा वास्ता, वो अपने रूठें हुये परम् पिता को मना लेते है ।


- डॉ.संतोष सिंह