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Hymn No. 496 | Date: 25-Nov-1998
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गिरूंगा मैं कई बार अभी गम ना है उठानेवाला मुझे तू है।
गिरूंगा मैं कई बार अभी गम ना है उठानेवाला मुझे तू है।

तेरे ख्यालों में बहकें अस्तित्वहीन हो जाऊँगा मैं याद दिलाने वाला तू है ।

पुरूष तू एक है इस जग में हम तो तेरी छाया हें ।

छाया को मैं मान बैठतें है, तेरे करीब होतें हुये तुझसे दूर हो जातें है ।

याद आनें पे तेरी इस भेद को मिटानें निकल पड़ते है ।

देर बहूत करतें है हम, हमें मिट जातें हीं सही समय पे पहुंच जातें है ।

खोयें हुये तो हम है खुदको तुझमें खोकें पाना तूझे है ।

समर्पित हो जान चाहते हें तुझमें सब कूछ भूल भालकें ।

हर मन की दीवाल को तोड़के, बह जान चाहते है तेरे प्यार में ।

यार कोई नहीं कीसीका, तू ही तो है एक सदा से ।


- डॉ.संतोष सिंह