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My Divine Blessing
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Hymn No. 500 | Date: 13-Dec-1998
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कह दें तू उससे सब कूछ, कहीं देर ना हो जाये ।
कह दें तू उससे सब कूछ, कहीं देर ना हो जाये ।
सुनता है सब कूछ, करता है कल्याण सबका सदा ।
अच्छें – बूरें का भेद ना रखें, शरण देता है चरणों में अपने ।
पुकारा है जिसने सच्चें मन से अपनाया उसनें उसे ।
जो मांगा जिसनें निराश ना किया कभी कीसीको उसनें ।
अपूर्व कथा है उसकी, ना कर सकता कोई बखान ।
अल्पज्ञानी आसक्त हूँ मैं विषयों में, मेरी ना कोई बिसात ।
तेरे द्वार की सीढीयों पे चढनें का हकदार ना हूँ मैं ।
रूंधे गलें से आवाज लगाता हूँ तुझको, मन के जंजाल से छुडा दें मुझे।
दिल से उपजें हुये सच्चे आसुओं की कसम, बंध जाने दें मुझे तुझसे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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बहुत सहा अपने कीयसें व्रूर कर्मों की सजा।
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झूठ बोला है सबसे मैंने, तुझसे ना कभी बोला ।
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