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Hymn No. 503 | Date: 15-Dec-1998
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सब कूछ तू ही तो है मेंरा लगता, तेरा नाम लेकें जीना सीखा दें प्रभु ।
सब कूछ तू ही तो है मेंरा लगता, तेरा नाम लेकें जीना सीखा दें प्रभु ।
मैं अज्ञानी समझ ना पाऊँ कुछ, भेद करता फिरता तेरे संसार में ।
भार हूँ में इस पृथ्वी पे, मुझे तुझमें खोकें जीना सीखा दें प्रभु।
कायापलट मैं अपना नहीं करना चाहता, मैं तो तेंरा बनकें जीना हूँ चाहता।
आदत मेंरी बदल दें तेरा आशीष देकें, रमनें लग जाये मन मेरा तुझमें ।
पतन कई बार हो चुका है मेरा, अब तो तेरे चरणो में स्थान की है कामना ।
दिल दुखाया है मैनें कईयों का कई - कई बार, अब दिल चुराना चाहता हूँ तेरा ।
श्रध्दा की कीरन जगी है कहीं भीतर से, प्यार के बूंदो से पखारूँ तेरे चरण कमल को ।
तन आजाद मन के संग बहुत बार है भटका, अब दास बनकें तेरा जीवन जीना हूँ चाहता।
संसार के हर भोगों में लिप्त हुआ कई बार, हर बार मन उपटा उन सबसे ।
निरर्थक मेरे इस जीवन को अर्थ प्रदान कर दें, ग्रहण कर लें दिल मेरे दिल में स्थान तू ।
कृतार्थ तूने बहुत कुछ दें कर किया, आज कृतार्थ कर दें मुझको आजन्म शरण दें करकें ।
- डॉ.संतोष सिंह
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हें। जगानें चला मैं तूझे, प्रभु खुद सोया हूँ कई बरसों से ।
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मैं रमना चाहता हूँ तुझमें, तू जैसे बसा दे वैसे बस जान चाहता हूँ ।
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