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Hymn No. 544 | Date: 02-Jan-1999
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हवालें किया कई बार खुद को तेरे, फिर मैं क्यों घिरा फिकर में मेरे ।
हवालें किया कई बार खुद को तेरे, फिर मैं क्यों घिरा फिकर में मेरे ।
मुझे उबार ले इस खेल से, मैं सबसे कमजोर खिलाड़ी तेरी दुनिया का।
बिन तेरे सहारें मैं चल नहीं सकता, दुनिया से पार पाना तो दूर की बात ।
साथ मुझे कीसी और का गंवारा नहीं, तू हाथ आया है यें मौका कैसे जाने दूं।
चाहत मेरी बडती जा रहीं है तेरे प्रति, राहत भी मिलता है मुझे मेरी तडप से ।
जुदाई भी बरदाश्त है मुझे तेरी, बस ख्याल रहे तेरा जुदा होने का हर पल मुझे ।
तब्बजो अब मैं कैसे कीसी को दे सकता हूँ, पहलें से आखीर तक जब तू ही तू है ।
मुझे बरदाश्त है गम का दरियॉं भी, मिलें बस तेरे हाथों से ।
अदा कर नहीं सकता शुक्रिया इस इक् पल, जो साथ बीताया है हमनें तेरे ।
खफा मैं अपने आप से हूँ ना कीसीसे, जो अपना समय गुजार लेता हूं बगैर तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह