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Hymn No. 546 | Date: 03-Jan-1999
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जो कूछ भी है इस जग में, तू ही तू है कहाँ कोई दूजा।
जो कूछ भी है इस जग में, तू ही तू है कहाँ कोई दूजा।
हम सब उत्पन्न हुये तुझसे, तेरा आभास मात्र है।
तारणहार तू ही, पालनहार तू ही, तेरे सिवाय कोई सहारा न हमारा।
मालीक तू करना कृपा इतना, तेरी वंदना करतें गुजारें हम दिन हमारा।
तेरा स्वरूप इतना प्यारा, कीसी एक में जो दिल लगाया तो सबको पाया।
आशीकों का आशीक है तू, तेरे आशीकी के आगें सब है झूठ।
सीखा दें तू हमें प्यार करना, प्यार करकें उसका इजहार करना ।
कमीं लाखों है हममें, उसे दूर करना तेरे हाथों में है।
तेरी कृपा पाकें कर लेंगे वो हम सब कुछ जो तू है हमसे चाहता।
गुजारीश करता हूँ मैं तुझसे दूर हो जाये हम कभी तुझसे, तू दूर ना होना हमशें।
जब से है हमनें तूझे जाना, दिल के करीब तूझे है पाया ।
साया बनकें बहुत जी लीया, अब तू समेंट ले हमकों अपने में ।


- डॉ.संतोष सिंह