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Hymn No. 549 | Date: 04-Jan-1999
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जुदा कब तक रहना होगा तुझसे, हम तो हो चुकें है फिदा तूझपे ।
जुदा कब तक रहना होगा तुझसे, हम तो हो चुकें है फिदा तूझपे ।
प्यार तो इक् बार होता है कीसीसें, ये बात कब समझ आयेंगी हमको ।
दुनिया से डरनें से अच्छा है, एक बार मर जाना दिल के हाथों ।
सिसकतें हुये जीवन जीनें से अच्छा है, मुस्कूरा के सुली पे चड जाना।
शाश्वत प्यार ना कभी मरता है, ना ही कम होता है प्यार तो प्यार है ।
कब कीससे होगा यें ना होता पता, होनें पे हर भेद को देता है मिटा।
सताता नहीं कीसीको, सताता है खुदको प्यार का प्यार पानें के वास्ते ।
मन के सग उडता है दिल की अतूल गहराईयों में प्रियतम् के संग।
प्यार के सिवाय कूछ ना है पहचानता, हर भेंद भूलाकें रमता है प्यार में ।
प्यार की मंजील प्यार है, प्यार कें बिना सब कूछ बेकार है।


- डॉ.संतोष सिंह