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Hymn No. 560 | Date: 06-Jan-1999
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दिल में इक् बात है, जो कहनें का व्याकूल हूँ मैं तुझसे ।
दिल में इक् बात है, जो कहनें का व्याकूल हूँ मैं तुझसे ।
हर दिन आराम से है कट जाता, मन को चैंन नहीं आता।
तुझसे मिलना रोज हम है चाहते, कोई बहाना मिल नहीं पाता।
सताती है याद मुझको तेरी बहुत ही, बड़ी मुश्किल से आती है नींद मुझे ।
तूझे देखतें ही बेकरार हो जाता है मन मेरा, हर लॉज को भूलाकें झूल जान चाहता हूँ बाहो में तेरी।
अकसर अपने उपर शर्म आ जाती है, पीछे मुडके देखता हूँ जब खुदको।
ख्याली पुलाव मुझें नही पकाना, कैसे भी करकें तू मुझें अपना लेना ।
झन्नत की सैर मुझे ना जाना है, मुझे तो तेर हमसफर है बनना ।
दिल्लगी कोई अगर है करता तो, कर लेनें देंना, जिल्लत की जिंदगी को छोडके प्यार में पगला जाना है मुझे ।
तेरे रहते हुये मैं कीसी के रहमों करम पे जीना नहीं चाहता।


- डॉ.संतोष सिंह