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Hymn No. 562 | Date: 07-Jan-1999
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अहेतूक आनंद का दरिया है तू, मुझ जैसी कीतनी इच्छाधारी नदियाँ समर्पण करती है तुझमें ।
अहेतूक आनंद का दरिया है तू, मुझ जैसी कीतनी इच्छाधारी नदियाँ समर्पण करती है तुझमें ।
मुक्त हो जाना चाहते है खुद से, तेरी खुदाई में डूब जाना चाहते है ।
मौत और जीवन कूछ भी नहीं चाहते, हर चाह को मिटाकें गुजरता रहे यें जीवन तुझमें ।
शक्ति नहीं हममें इतना, संजो सकें तेरे द्वारा पायें जीवन को ।
भरा – पड़ा है जीवन सारा, करमों के ऊँचे – नीचें लेंखा जोखां से ।
मुक्त होके गानें का दिल करता है, तेरे प्रेम के सागर में डूबकें ।
सनमं बना लेना चाहता हूँ, तुझको, तेरे प्यार से अपने मांग को संवार लूँ।
कीसी और रहनुमां की ना है मुझे तलाश, तेरे प्यार के सिवाय कूछ ना चाहता हूँ ।
कसम है तूझें मेंरी, तोड़ दे सारी बेड़ीयाँ हमारी प्यार से तूझे छु लेना चाहता हूं।
दामन पे लगें धब्बों का डर ना है मुझे, मैं तूझे दिल में बंद कर लेना चाहता हूँ ।


- डॉ.संतोष सिंह