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Hymn No. 563 | Date: 07-Jan-1999
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णोहब्बत कर लेनें दें तू मुझे, जो जांन बन चुका है तू मेंरा ।
णोहब्बत कर लेनें दें तू मुझे, जो जांन बन चुका है तू मेंरा ।
प्राणों का होमं कर दूंगा तूझपे, अपनीं मोहब्बत की पहचान छोडनें के वास्ते ।
वे रास्तें जो जातें है तेरे दर की ओर, जांन की बाजी लगाकें चलेंगे हम उसपे ।
यादगार बन जायेगे, सब भूलेंगे तेरी मोहब्बत में गुम हो जायेगे हम ।
चाहत मिलन की ना है मुझे, तसव्वुर मिलता है दिल को तेरे मोहब्बत में तडपनें से ।
शमां के भांती तिल – तिल तडपेगे, तेरे मोहब्बत में मिटनें के वास्ते ।
एहसान ना करता हूँ मैं तूझपे, इस दिल में जिंदा रखना चाहता हूँ कीसी न कीसी बहानें मोहब्बत को।
तेरे आगोश की चाहत मुझें शिद्दत से थीं, डर लगता है कहीं पाकें मगरूर न बन जाऊँ ।
मोहब्बत तो मोहब्बत है मोहब्बत को मोहब्बत ही रहनें देंना तेरे मोहब्बत में ।
दोष कोई ना देंगा मुझे, सब यहीं कहेंगे तेरी मोहब्बत पाकें सब ऐसा हो जातें है ।


- डॉ.संतोष सिंह