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Hymn No. 564 | Date: 07-Jan-1999
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प्रभु का प्यार जो मिल जाता है, तो दिल का हर भार निकल जाता है।
प्रभु का प्यार जो मिल जाता है, तो दिल का हर भार निकल जाता है।
चमन में कीतनें भी फूल खिलें हो, दामन में जब तक ना है खिलतें दुनिया उजाड सी लगती है।
बंसी जब तक ना बताओगें चैंन की, दिल कैसे प्यार कर पायेंगा प्रभु से।
आगाह तूने बहुतों को बहुत बार किया, अब खुद को आगाह कर लें अपने करमों से।
जन्म लेनें पड़तें है इन्हीं करमों की वजह से, तोबा कर लें प्यार में मसरूफ हो जा तू प्रभू के।
गुलजार हो जायेगा तेरा दिल, प्रभु का प्यार पाकें, तू बन जायेगा सबकें आँखो का नूर।
दूर नहीं है तेरी मंजील, तेरे बहुत ही करीब है, बन जा तू बस उसका मुरीद।
जिद ना रखना उससे कोई उसकें दिल की करतें जाना, आसान हो जायेगा प्यार पाना उसका।
हर जुबां पे होगी तेरी कहानी, कभी ना होगी वो पुरानी।
अश्क उभरतें है आँखों में तो आने देंना, दिल को तू कभी ना राने देना।
दिल तो हो चुका है प्रभु का, प्यार में तो उसकें हँसना – रोना खुद को खो जाने देना।
जो तू पायेंगा प्यार में उसके वो कोई नहीं जान पायेगा, तू इक् अंतहीन कहानी में डूबता चला जायेगा।


- डॉ.संतोष सिंह