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Hymn No. 565 | Date: 07-Jan-1999
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शब्दों की क्याँ जरूरत है, प्रभु पे प्यार का इजहार करनें के लिये।
शब्दों की क्याँ जरूरत है, प्रभु पे प्यार का इजहार करनें के लिये।
मौनं हो जाना चाहता हूँ, तेरे प्यार में मदमस्त होके ।
कुछ कहनें – सुननें का ना मन होता है, अपलक निहारनें का दिल करता है तूझे।
तेरे संग गुजारें गायें लमहो को याद करकें दिल में गुदगुदी सी उठती है।
हमें ना अपना ख्याल करनें का, ना ही जग का ध्यान रखनें का मन करता है।
युं ही गुमशुम रहना चाहता हूँ, इस दिल को तेरे दिल से जोड लेना चाहता हूँ ।
हर सीमाओं को तोड़ देनां चाहता हूँ, तेरा संग पानें के लिये हूँ बेकरार मैं ।
खबर खबर को तोड़ लानें की बात ना हूँ, करता हम तो तुझसे दिल की बात है करतें।
डरना – मरना हमें कुछ मालुम नहीं, प्यार के सीवाय हमें कूछ मंजूर नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह