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Hymn No. 566 | Date: 08-Jan-1999
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तेरे बिना हम खुदको है अधुरें पातें, ऐं ।़।़ मेरे सम्पूर्ण परमपिता।
तेरे बिना हम खुदको है अधुरें पातें, ऐं ।़।़ मेरे सम्पूर्ण परमपिता।
सारी शक्तियाँ है तेरी दास, फिर भी तू ना कीसी पे हक जताता ।
जाने का अधिकार दिया तूने, सबको अपने स्व अनुसार ।
किया हमनें सदा मनमानी, फिर भी तूने ना किया कोई टोका टाकी।
कर्मों के बाणों से जब घायल हुये हम, तूने पालक बिछाकें स्वागत किया हमारा।
अपना अनमोल प्यार देकें, भीतर से कायापलट की शुरूआत किया तूने ।
जो हमनें जाना नहीं था, कुछ कुछ पढ रखा था ज्ञान की कीताबों में ।
वो तूने धीरे से हमको समझाया, जीवन का रहस्यमय प्रेम का पाठ तूने पढाया।
निश्चिंत होके सरलता पूर्वक जीवन की डगर पे हौले – हौले तूने बडना सीखाया।
संकुचित वृत्तियों को त्याग कें, अपने प्यार में सबको अपना बनाना सीखाया।
हार – जीत से कहीं उपर, भीतर से सुर्य के भांती जगमगाना सीखाया।
सारे भावों को भूलाकें आत्मनंद में मस्त रहके, परम पिता का गीत गाना सीखाया।
तूने हमको वो दीया जो हम सबकी कल्पना से है परे।
मैं अज्ञानी उतार नहीं सकता शब्दों में, हम तो बस डूब जाना चाहते है तुझमें।


- डॉ.संतोष सिंह