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Hymn No. 569 | Date: 08-Jan-1999
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याद सताती है तेरी, लुभाता आया है हमको तू सदा से ।
याद सताती है तेरी, लुभाता आया है हमको तू सदा से ।
चाहता हूँ तुझको मैं करीब अपने, करना क्या होगा बता दें तू मुझको ।
गीत नयें – पुरानें गाता हूँ, तेरा दिल चुरानें के वास्ते ।
वो सब मैं करता हूँ, जिनको करकें लोग तूझे पातें है ।
हर उस राह पे चलनें को हूँ तैयार, जो जाती है तेरे दर की ओर।
कीसी के भी चरण पकडने को हूँ तैयार, जो दीदार करा दें तेरा।
तेरी सजदा करनें को दिल बेकरार है, तू सीखा दें सजंदा करना।
हर रात को इस आश से सोता हूँ, खांबो में मुलाकात होगी तुझसे ।
दिन को मिन्नतें मैं तेरी तुझसे करता हूँ, कीसी चौराहें पे मिल जायेगा तू मुझको।
इतना क्यों है तू तडपाता, क्या मेरी तडप तूझे सच्ची नजर नहीं आती।
जलता रहूंगा सदा अपने प्यार को बुझने ना दूंगा, खामोशी से करेंगे तेरा इंतजार ।
प्यार जो तुझसे किया तेरा दामन ना छोडेंगे, हम प्यार तेरा पाकें लेंगे दम हम।
- डॉ.संतोष सिंह
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तेरे गीत ही मेरे दिल की धडकन है, उनकी धूलनों पे झूमतें है हम ।
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कूछ ना छिपा है तुझसे, फिर भी छिपा के रखता है सब कूछ।
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