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Hymn No. 570 | Date: 08-Jan-1999
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कूछ ना छिपा है तुझसे, फिर भी छिपा के रखता है सब कूछ।
कूछ ना छिपा है तुझसे, फिर भी छिपा के रखता है सब कूछ।
बांटता है प्रेम सबको, जानतें हुये सब कुछ सबकें बारे में ।
अहसास ना होने देता है तू कीसीको, भूत वर्तमान भविष्य सबका देख लेता है।
कीसी को खबर नहीं होने देता, चुपचाप अनहोनी को टाल देता है ।
जीवन में तू सब कुछ करता, ना करता है तो बयान कोई कीसी पे ।
ऐसा पे तू कर लेता है, जानतें हुये चुपचाप तू कैसे रहता है ।
खबर ना होनें देता है, कानों कान कीसी को अपने बारे में ।
कर गुजरता है तू कुछ ऐसा, जिसकी छाप सदीयों तक ना मिटती है।
हर पल तू कुछ ना कुछ करता है, हमारा जीवन तू बदल देता है ।
रचता है हर पल तू कुछ नया, बिन कुछ कहें तू हर कर्म करता रहता है ।
- डॉ.संतोष सिंह
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