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Hymn No. 572 | Date: 09-Jan-1999
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मस्ती करतें रहते है हम, दुखके बादल देखतें ही उठतें है घबरा।
मस्ती करतें रहते है हम, दुखके बादल देखतें ही उठतें है घबरा।
अपनी मस्ती को भुलाकें, भागते है सब कुछ छोडके प्रभु के पास।
यहीं करम् अगर पहलें किया होता तो, फर्क ना पड़ता चाहें जो कुछ होता।
आतें है ये सब तो, सोतें से हमको जगाकें प्रभु की याद दीलाने के वास्तें ।
इक् बार तू हो जा मस्त उसमें, मस्ती का ऐसा आलम छायेंगा।
कूछ का कूछ हो जाये तेरे जीवन में, तू खुद भी खबर ना पायेंगा।
तू दिल से जो गायेंगा, वो सब कुछ प्रभु तुझसे कहलायेंगा।
मस्ती इतनी आ जायेगी तुझमें, प्रभू तेरा यार नजर आयेंगा।
जब भी जहाँ तू जहां में जायेगा, प्रभु को वहाँ तू पायेंगा।
दिल तेरा गीत गायेंगा बेपरवाह होके जमानें से, वो तो प्रभु को पायेंगा।
- डॉ.संतोष सिंह
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