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Hymn No. 574 | Date: 09-Jan-1999
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इक् तरफ है प्यार, दूसरी तरफ आसक्ति, दोनों के बीच है तकरार।
इक् तरफ है प्यार, दूसरी तरफ आसक्ति, दोनों के बीच है तकरार।
आसक्ति मोह में डालें मन को, दिल तरसें निर्झर प्यार पानें के लिये ।
जंग जारी है दोनों के बीच, चिरकाल से चिरकाल तक बरकरार रहनें की।
पलडा भारी है शाश्वत प्यार का, आसक्ति का अंत होना है आज नहीं तो कल।
मिटता है सब कूछ मिटता नहीं प्यार, रंग रूप बदलता है सबका, प्यार तो प्यार रहता है।
तरसता है हमारा दिल खुदा पे प्यार लूटानें के लिये, अपना बनानें के लिये।
हथियार डालता है मन हमारा आसक्ति के सामनें, ना ही हमारा दिल।
बैचेन हो जाता है अपने आपकों उसके पंजे से छुडानें के वास्तें ।
पुकार उठता है हाथ उपर करकें, ऐं खुदा तू बता दें कहाँ रह गयीं प्यार में मेरे कमीं।
मुस्कूरा के पास आता है खुदा उसकें, मैं के बंधन से छुडा के लें लेता है आगोश में अपने।
- डॉ.संतोष सिंह
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