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Hymn No. 575 | Date: 09-Jan-1999
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बजनें लगतें है दिल में मेरे साज प्यार पाकें तेरा।
बजनें लगतें है दिल में मेरे साज प्यार पाकें तेरा।

तरन्नुम में हो जातें है हम, आती है जब बयार तेरी ओंर से।

दिल का तार झनझना उठता है गीत तेरे सुनकें ।

बावला बन जातें हं हम, तूझे अपने सामनें पाकें ।

कुछ भी समझ नहीं आता, ना ही समझना है चाहते ।

यहाँ-वहाँ, जहाँ-तहाँ देखुं तूझे ही पाते है।

मस्ती का जुनून सर पे चढके है बोलता।

हर ख्याल को भूलाकें दिल तुझमें है डूबता।

हर चीज मिटती नजर आती है, तब तुझको करीब पातें है ।

इतनी सी बात समझनें के वास्ते, खुदा को छेडना पड़ता है तराना।


- डॉ.संतोष सिंह