VIEW HYMN

Hymn No. 577 | Date: 09-Jan-1999
Text Size
अलख जगा दें मेरे अलख निरंजन, रमता फिरूं में हरदम।
अलख जगा दें मेरे अलख निरंजन, रमता फिरूं में हरदम।
दम दमादम तो तू है बेदम हूँ मैं, तेरा संग पाकें बम बम हो जाऊँगा।
हर गम टकरा कें चुर - चुर हो जायेगे मुझसे, तेरा गीत गाता रहूंगा हरदम।
इस जीवन कें हर दुरूह गलीयों को पार कर जाऊँगा जयजयकार करतें हुये तेरा।
रात हो या दिन दिल डूबा रहेगा तुझमें, जब तक तन ना हो जायेगा बेदम ।
बेहाल रहूंगा फिर भी तेरे सिवाय कोई ख्याल ना आनें दूंगा मन में ।
निराशा क्यों होनें लगा मैं कीसी से, जब आम का ही ख्याल है ना ।
कोई कैसे चोट पहचायेंगा मुझे, घिरा रहता हूँ तन की दीवालों से ।
ऐं मेरे रहबर मेरी खुशनसीबी है तू मिल गया मुझे ।
कूछ ना होनेवाला है मेंरा, जो होना वो तो हो चुका मालीक तेरीं दया से।


- डॉ.संतोष सिंह