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Hymn No. 578 | Date: 10-Jan-1999
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हर इक् को अधिकार है, प्रभु के करीब जाने का।
हर इक् को अधिकार है, प्रभु के करीब जाने का।
जिसनें दिल की सुना अपने, उसका तो अधिकार है पानें का।
विषम से विषम परिस्थितीयों में, रखा धैर्य मन पे अपने ।
उसनें जीता इद्र का साम्राज्य, बिन कूछ कीयें धरें ।
मोह से दूर होना रहके इस माया से भरी धरा पे ।
सबसे बडा तप है, हर पल दिल में प्रभु से बतिया लेंना।
सार्थक हा जाता है जन्म उसका, जो हर कार्य निबटायें ।
प्रभु का आदेश समझकें, लाभ – हान से मुक्त कर्म पे देता जोर।
हर एक की अपनीं समझ है, हर इक् का अपना तौर – तरीका।
नहीं है कीसी को लीक् का फकीर बनना, जहाँ दिल आया वहीं जाना।
लायक नहीं हम उसकें, हमारा श्रध्दा और विश्वास है ।
जब दया होगी हमपे उसकी, वो अपने करीब बुला लेंगा।
- डॉ.संतोष सिंह
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अलख जगा दें मेरे अलख निरंजन, रमता फिरूं में हरदम।
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