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Hymn No. 581 | Date: 11-Jan-1999
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दिल में ना है कमीं हमारें, कमीं है तो हमारें प्रयत्नों में ।
दिल में ना है कमीं हमारें, कमीं है तो हमारें प्रयत्नों में ।
करना चाहते है बहुत कुछ हम, ठानतें नहीं कुछ भी।
सीखना है बहुत कुछ, अपने आपको मारके जीनां हूँ लोगों के लिये।
करने से पहलें खुद को सौंप देंना है प्रभु के हाथों में ।
परिणाम की फिकर ना करना है, बस करतें जाना है ।
आदेश मानकें उसका, रमतें हुये मान न होनें देना मन को।
अलमस्त सा जीवन जीना खोकें प्रभु में, कष्ट आयें चाहें तन – मन को।
अपना होके कुछ ना स्वीकारना, ना ही करना, सब उसकी कृपा समझना।
णस्ती भरा होगा जीवन का हर पल, आनंद के साक्षात स्वरूप को पायेंगा।
प्रभु के आंगन में बैठ गीत उसका गायेंगा, खूद को तू ना पायेंगा।


- डॉ.संतोष सिंह