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Hymn No. 582 | Date: 11-Jan-1999
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झूठ बोला हूँ सबसे, झूठ ना बोलूंगा तुझसे कभी प्रभु तू मदद करना सदा।
झूठ बोला हूँ सबसे, झूठ ना बोलूंगा तुझसे कभी प्रभु तू मदद करना सदा।
दिल तोड़ा हूँ अनेकों अनेक बार अपने प्रियजनों का ना तेंरा कभी प्रभु तू मदद करना सदा।
खरा ना उतर पाया हूँ कीसी की अपेक्षाओं पे, उतरूँ सदा तेरी अपेक्षाओं यें प्रभु तू मदद करना सदा।
हार माना है मैंने विषम परिस्थिती देखकें, हार न मानुंगा तेरे दर की और चलतें हुये प्रभ तू मदद कर।
लज्जा का पात्र कई बार बना निगाहो में अपने, लज्जास्पद कर्मों की ओर मुडने ना देंगा प्रभु
सचित किया है कर्मों को प्रारब्ध में, होम कर दूं अपने आपको तुझमें प्रभु
बिपरीत से विपरीत क्षणों sं दिल मेरा घबरा जाता था तू ढांढस बंधाना प्रभु
हर अनहोनी को होने देंना, हमें धैर्य रखना तू सीखाना प्रभु
अब तक साथ ना छोडा कीसीका, पकडा जो साथ उसका प्रभु तेरे अनुरूप रहना सीखाना प्रभु
हास्य्यास्पद जीवन को छोडके, जो तू कहें वैसा करें बनकें निर्मिक प्रभु तू मदद करना सदा।
- डॉ.संतोष सिंह
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दिल में ना है कमीं हमारें, कमीं है तो हमारें प्रयत्नों में ।
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काबू करना सीखा दें, तू इस दिल को, रंग के रंग में अपने ।
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