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Hymn No. 596 | Date: 14-Jan-1999
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कैसा है तू वालम मेरा, जिसे पुकारना पड़ता है आनें के लिये।
कैसा है तू वालम मेरा, जिसे पुकारना पड़ता है आनें के लिये।
काहें को पड़ गया प्यार में तेरे, अच्छा – खासा था अपने जीवन में ।
दिल चुराया तो ठीक था, रात को तूने नींद क्यों चुराई ।
चुराया तो पास फिर क्यों नहीं आया, तडपाने में तोहें ऐसी क्यों मजा है आती ।
सताता है तू और मेरा दिल मिलकें मुझें, चैंन न आयें जी को मेरे ।
खता क्या है यें तू बता दें, कीस बात की सजा हम है पातें ।
भैरी बन गया हूँ मैं अपने आपका, प्यार में तेरे पड़के।
लडकें भी लेंना पड़ा तो लडकें लूंगा मैं तूझे सारी दुनिया से ।
दया ना करना तू मुझपे, मेरा हक तू देना मुझे।
जीत लुंगा मैं तूझे दिल के हाथों से, आज नहीं तो कल तू मेरा होगा।
सनम हर सपना संजोया है मैंने लेकें तूझे, टूटनें ना देंना मेरे सपनों को ।
वक्त आनें पे सो जाऊँगा उन सपनों के संग सदा के लिये ।
हिमाकत ना है मेंरी, यें तो प्यार की पुकार है प्रिय के लिये।
इक् बार फिर से कूर्बान हो जायेगे प्यार पे, चोट ना आने दूंगा दिल पे तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह