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Hymn No. 604 | Date: 15-Jan-1999
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आज की बात ना है, सदियों से लुभाया है तूने हमें ।
आज की बात ना है, सदियों से लुभाया है तूने हमें ।
दिल चुराके तू छुप जाता है कहीं, ढुँडते बीत जाता है जीवन सारा ।
नजर हमें तू नहीं कहीं आता, बात हो जात है वहीं पुरानी ।
होश में रहतें हुये ना रहतें है हम, याद जब आती है तेरी ।
तुझसे गुजारीश कर बैठतें है, प्यार का वास्ता देकें मुलाकात के लिये ।
अजीब दास्तां है हमारी, बिन देखें – सुनें प्यार कर बैठें तुझसे ।
तारीख पे तारीख गुजरती गयीं, बैचेन मन को चैनं न भाया ।
सजा कीस बात की थी, हॉल देखकें मेरा लोग हिचकेंगे दिल लगानें से ।
मुनहार करूंगा मैं बहुत तेंरी, हो जाने के लिये तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह