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Hymn No. 612 | Date: 17-Jan-1999
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शोर मचाया बहुत, अब ध्यान में रहना सीखा दें ।
शोर मचाया बहुत, अब ध्यान में रहना सीखा दें ।

कुदा कादी किया बहुत, अब एक जगह टिक जाउँढ तुझमें ।

भेंद भाव बहुत बरता मन में, समरसता ला दें तू मुझमें ।

अलग हो जाऊँ सबसे, जो जुड जाऊँ मैं तुझसे ।

कृपा रहे तेरी सदा, जो मस्त रहूँ मैं तुझमें ।

संजोया बहुत कुछ, अब तू मुझें लुटाना सीखा दें ।

गीत गातें हुये, गीतों को दिल में उतार लेना बता दें।

रहूँ मैं कहीं भी, पास तेरे पहूँचना सीखा दें ।

मन के पंक्षी को पकड के, पिंजड़े में बंद करना सीखा दें ।

आज कल कें फेरे में ना पडूं, दिल तुझमें रहे हर पल तू सीखा दें ।


- डॉ.संतोष सिंह