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Hymn No. 613 | Date: 17-Jan-1999
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तेरे रास्तें में पड़ा था इक् पत्थर, लगीं जो ठोकर उसको तेंरी ।
तेरे रास्तें में पड़ा था इक् पत्थर, लगीं जो ठोकर उसको तेंरी ।
बदल गयीं कीस्मत उसकी, कायापलट हो गया उसकें सारें जनमों का।
भटकें लोग तेरे लिये, यहाँ – वहाँ इस सारें जहाँ में ।
अंजाने तू उसकें हाथ आ गया, वो तुझको युं ही पा गया ।
सीतारें भी चमक कें बुझते है, एक से एक लोग गुजर जातें है धरा से ।
हाथ आ गया जो उसके तू, सारें ब्रह्माण्ड के खजाने की कूंजी पा गया ।
जिसकें लिये जन्म लेतें है इस मानव तन में, सब न जाने क्या क्या करकें।
उसनें तेरी कृपा से पा लिया, बहुत कुछ ऐसा जो उसनें ना सोचा था।
हाथ जो था तेरा सर पे, प्यार करना सीखकें तुझसे, प्यार में उलझा लीया तूझे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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