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Hymn No. 622 | Date: 19-Jan-1999
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क्याँ माँगु मैं तुझसे, बिन् कहें दें रहा है सब कुछ तू मुझें ।
क्याँ माँगु मैं तुझसे, बिन् कहें दें रहा है सब कुछ तू मुझें ।
तेरे पास आता हूँ तो, याद नहीं आता है कूछ ।
दिल चाहें कहनां बहुत कुछ तुझसे, समझ नहीं आता हूँ उसको ।
देख के तूझें जी चाहता है, आगोश में भर लूँ अपने ।
कहाँ से न जाने मन में क्याँ आ जाता है, देखतें ही रह जाता हूँ ।
मुलाकात क्यों छोटी होती है, तनहाँ रहता हूँ मैं तेरे लिये ।
दूरियाँ कब मिटेंगी तेरे – मेरे बीच की, मीत मैं कब बदलूंगा।
हर सवाल दिल में तूने पैदा किया, जवाब तूझे ही देनां होगा ।
ऐं मेरे मौला तू मेंरी कीस्मत बदल दें, पास बुलाकें अपने ।
मुझें मुताबिक बना दें तेरे, ना रहूँ मैं मेंरा ।


- डॉ.संतोष सिंह