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Hymn No. 626 | Date: 19-Jan-1999
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आस्थां हमारीं बरकरार है, तुझमें सदियों से, बदलती रहती है हमारी मनस्थिती ।
आस्थां हमारीं बरकरार है, तुझमें सदियों से, बदलती रहती है हमारी मनस्थिती ।
जीवन जीनें का मापदंड बदला, बदलतें हें संसार के तौर – तरीकें धर्म के संग ।
जाती बदली, बदलती रहीं भाषा हमारीं, देश – काल कुछ ना टिका बदला सब कुछ ।
बदलतें हुये संसार में ना बदला है कूछ, तो प्रभु वो तू है, तेरे दर की राह एक है ।
हर भेंद से उपर उठकें अपनाया है तूने सबको मायनें ना है कूछ तेरे लिये ।
विश्वास जिसनें रखा तूझपे, बरसा प्यार तेरा उसपे, बिन कूछ कहें पाया वो तूझें ।
लानत है हमपे जो तेरे परम विश्वास को भुलाकें, स्वीकार कर लेतें है हार को ।
हारेंगे हम, हारेंगा ना तू, बांधा जो प्यार की डोर से उबार कर छोड़ेगा तू हमें ।
धैर्य रखेंगे तेरे आना का, हमारी आस्थां मजबूर करेंगी तूझें हमारें पास आनें का ।
प्यार के अटूट बंधन में बांधेगे तूझे, रहना होगा हमारे साथ तू


- डॉ.संतोष सिंह