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Hymn No. 627 | Date: 20-Jan-1999
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चीर के रख दूंगा अंधेरी रातों का सीना, संग रहे तू मेरे सदा ।
चीर के रख दूंगा अंधेरी रातों का सीना, संग रहे तू मेरे सदा ।
कांटों से भरी राहो पे चल पडूंगा तेरी ओर, कृपा रहे तेरा मुझपे हमेंशा ।
मायावी राक्षसों से जुझता रहूंगा, घुटनें ना टेकुंगा, तेरी गाथा सुनके लडता रहूंगा।
कमजोर ना है दिल मेंरा इतना, हर बार समर्पण करूं इच्छाओं के आगे ।
बड चुकें है जो कदम तेंरी ओर, रूकनें ना दूंगा तन साथ दे या ना दें ।
विश्वास जम चुका है तूझपे, उसे तोड़ ना है सकता कोई तेरे बिना ।
औलाद हूँ मैं तेरी, अभी कई बार और गिरूंगा, हर बार उठकें तेरी ओर बडtंगा।
हर तूफां का दौर जो आयेगा जीवन में गुजरनें के लिये, हम तेरे पास आयेंगे जरूर।
जो तूने सीखाया उसे व्यर्थ होनें ना देंगे, अपनी बली चढाकें कर दिखायेंगे ।
लाख दूरियाँ हो तेरे – मेरे बीच, चैंन न आयेगा मुझको जब तक ना पहुंचेगे तेरे दर को।


- डॉ.संतोष सिंह