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Hymn No. 628 | Date: 20-Jan-1999
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सब पता है, सब पता है तूझे, जानतें हुये तू सब कुछ खेंल खेलता है हमशें ।
सब पता है, सब पता है तूझे, जानतें हुये तू सब कुछ खेंल खेलता है हमशें ।
खेल तेरा जारी है, न जाने कीतने, काल बीत गये, पर दिल अभी दिल तेरा भरा नहीं ।
करता तो तू एक है, पहना देंता है तू हम हमारें कर्मों का जमा, मग्न हो जातें है हम उसमें ।
हमारें भरम को तोड़ना तूझे ही पड़ेगा, उंगली हमारीं पकडनी पड़ेगी लौटा लें चलने के लिये।
हमें कुछ ना है पता करतें जा रहे है, आंख होते हुये भी अंधे है ।
सदा से रट लगायीं तेंरी, जजबात ना पैदा कर सकें अपने आप में इतना, बुला लें करीब तूझे।
हर इक् दौर के बाद दिल मेंरा हो चुका है र्निद्वंद, सस्ती से बढेगा भक्ति के साथ तेंरी ओर।
खामोशी तेंरी अच्छी ना है, सुनता है तू सदा से अब जवाब देना पड़ेगा तूझें ।
मुक् बनकें दिल में जवाब कई दियें, सब खुलकें साथ देनां पड़ेगा हमें संवारनें के लिये ।
तूझे दोष किंचित मात्र ना हूँ देता, यें तो प्यार भरा हठ है, तेरा किया हुआ बयांन ना हूँ कर सकता।


- डॉ.संतोष सिंह