My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 629 | Date: 20-Jan-1999
Text Size
तेरी हर बात हूँ सुनता बड़े ध्यानं से , क्यों नहीं मन है मानता ।
तेरी हर बात हूँ सुनता बड़े ध्यानं से , क्यों नहीं मन है मानता ।
जानता हूँ तूझे, क्यों अंजान बन जाता हूँ करमों से अपने ।
खाली – पीली प्यार का गीत सुनाता हूँ, क्यों नहीं मग्न हो जाता हूँ तुझमें ।
प्रभु जुंझता नहीं हूँ अपने आप से, जुझता रहता हूँ दुनिया से ।
पास तेरे कई बार आया हूँ, दिल को तुझसे क्यों नहीं जोड पाया हूं ।
कमीं कई है मुझमें, इन कमीयों से कैसे पीछा छुडाऊँ मैं ।
मेंरा जो भी हज्र होता है होनें दें, मेरे प्यार को तू ना ठूकराना कभी ।
हम जैसे लोग मरतें है, अपनी ही मौत, प्रभु तेरा ना कोई दोष।
प्रभु तू क्यों खामोश है इतना, लगता है दिल में हमारें जोश नहीं ।
टूटेंगा इक् दिन हमारा भरम, निभानें लग जायेगे अपने आप तेंरा धरम् ।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
सब पता है, सब पता है तूझे, जानतें हुये तू सब कुछ खेंल खेलता है हमशें ।
Next
हक तूने बहुत कुछ दिया है हमें, कर गुजरनें के लिये।
*
*