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Hymn No. 648 | Date: 24-Jan-1999
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चित्त में तू है मर तो डर कीस बात का
चित्त में तू है मर तो डर कीस बात का

साथ तू रहे हर पल हमारें, क्यों करें परवाह जमानें की ।

चित्त में वास तेरा रहता है, हर पल हम खोये होतें है तुझमें ।

होनें का किंचीत मात्र आभास ना होता, है दिल को ।

दुखद – सुखद सब एक सा लगता है।

प्यार का तराना उठता है, हर पल नया फंसाना बनता है ।

नांचता है मन उसपे, जीते है हर पल आनंद के तरंग में ।

पल भर को बिछुड़े हम तुझसे, हाल बुरा होता हें जैसे जल बिन तडपे मछली ।

प्यार का वास्ता देतें है, तू निवास कर लें इस चित्र में ।

तेरे बिन सब है बकवास, गर तेंरा वास चित्त में ना है तो वो भी है बकवास ।


- डॉ.संतोष सिंह