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Hymn No. 656 | Date: 26-Jan-1999
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प्रभु तूने ना किया कभी कुछ अपने लिये, हर पल जीया तू हमारे लिये ।
प्रभु तूने ना किया कभी कुछ अपने लिये, हर पल जीया तू हमारे लिये ।
तेंरी विशालता है इतनी, तू स्वीकारता है इस थोर करम वालें को ।
बनतें रहे हम सदा तुझसे, सरल बना रहा तू हमशें सदा ।
लायक तो हम नहीं तेरे, जहाँ में मुझसे अच्छें और भी थें, फिर भी शरण दिया तूने हमें ।
बेंकार थें हम सबसे ज्यादा, इस निखट्टू को अपने सम्मुख बिठाया तूने ।
प्रभु जैसा भी हूँ तेरी समझ को धोखा ना दूं कभी दे दें आशीष हमें।
जो चाहें तू, वहीं कर दिखाऊँ, बिना प्राणों की परवाह कीये ।
शरण मिलें मुझें सदा, दर पे तेरे, भलें बननां पेड अदना सा जीव मुझें ।
गलत तो हम करतें है, सहीं राहो पे तू ही तो लें आता है हमें ।
भीख मांगता हूँ तुझसे मुलाकात के लिये, निगाह पड़तें ही तेरी दीवाना बन जायेगे हम तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह