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Hymn No. 662 | Date: 28-Jan-1999
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सांसों में रहती है यें आश तू रहता है सदा साथ ।
सांसों में रहती है यें आश तू रहता है सदा साथ ।
तेरां दीदार करता हर पल चाहें जग का हो कोई कोना ।
गीत तेरा गाता में, हर पल बीतें मेरा सान्निध्य में तेरे ।
तेरा पता बताता सबको अपनी धून में कहाँ कूछ जाता तेरा ।
नजर नहीं आता तू सबको, वास करता है दिलों में हमारें ।
प्रेमीयों के नजरों से छूप नहीं पाता, मजबूर हो जाता है प्यार में ।
कहाँ कूछ तेरा है जातृ भग्न हद्रय की मुरांद हो जात है पूरी ।
खेलना तू हमशें बहुत, खेलना ना कभी प्यार से हमारे।
जितना तडपेगे हम, अंजाने में तू भी तडपेगा दिल के हाथों तेरे ।
खुद को मिटाकें गातें है प्यार का तराना, ना चाहीये कूछ नजराना ।


- डॉ.संतोष सिंह