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Hymn No. 665 | Date: 28-Jan-1999
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दिल की जो बात है उसे मन क्यों नहीं है मानता ।
दिल की जो बात है उसे मन क्यों नहीं है मानता ।
तन टालता है दिल के साथ को, भागाता मन के साथ ।
मुझें ना है कुछ गंवारा, हर बार तूने है संवारा ।
रहबर मेरे मुझें सौंप दें, प्यार से भरें गीतों की नैय्या पे ।
डूबनें – उतरनें का डर निकल जायेगा, जब होगी पतवार दिल कें हाथों में ।
तूफाँ से उपजेंगा प्यार का संगीत, दिल गायेंगा झुमकें नया तराना ।
मन का खौफ निकल जायेगा, दिल दीवाना हो जायेगा।
अंजान नयीं राहो का डर, दिल से निकल जायेगा, वो तो प्यार भरा गीत गायेंगा।
मंजिल की बात ना होगी, हर राह मंजिल की ओंर होगी ।
छोर की तलाश कीसे, मंजिल जो साथ होगी ।
न जानां रहेगा, ना रूकनां, दिल तो इन सबसे अनजांन रहेगा।
वो तो गीतों को गातें हुये, तेरे प्यार में भूला रहेगा।


- डॉ.संतोष सिंह