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Hymn No. 666 | Date: 28-Jan-1999
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जो मंजुर हो खुदा को, वहीं हो जीवन में हमारें ।
जो मंजुर हो खुदा को, वहीं हो जीवन में हमारें ।
नहीं चाहीयें मुझें कुछ ऐसा, करता हो जो जुदा खुदा से ।
बहुत दूर रह लीया तुझसे, अब पास बुला ले तू हमें ।
आरजुं ना है मेरी, यें तो पुकार है प्यार की।
जीवन का सार ना है मुझें समझना ।
कर लेनें दें तू हमें जी भरकें प्यार तुझको ।
है यें हमारी नादानीयत, पुकांर लेते है प्यार में तूझें कैसे भी ।
तू भी इक् बार नादानी कर बैठनां, दोष प्यारा को दें देना ।
दिल से मजबूर हूँ, समझायें ना है ये समझता।
तू जो भी सजा दें देना, प्यार से ना दूर करना ।


- डॉ.संतोष सिंह