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Hymn No. 667 | Date: 28-Jan-1999
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हें प्रभु सुनां तू कुछ हमशें तू, करहीयाँ अपने मन का ।
हें प्रभु सुनां तू कुछ हमशें तू, करहीयाँ अपने मन का ।
रोकब नाहीं हम तोहें, पर कहलें बिना मानब न हम ।
बहुत मन मानीं करेंला, केहूं तोके टोकें वाला नहीं ।
जब चाहें तू कुछ न कुछ उल्टा – सीधा कर देवेला ।
कहाँ कुछ तोकें त, ज्ञानं क पाठ लगबा पढायें हम सबकें ।
येहर – ओहर क तीन – पाँच बतियांय के समाझाई देबां हमनेकें ।
पटत नाहीं तोहार कवनों बतिया, रीस तू बहुत लागत है ।
मन मारकें रह जाईला, तोहार कुछ ना कर पाईला ।
छोडब नाहीं हम तोकें, बांध लेब प्यार के रसारिया में ।
इ ससार में का बाय, जेकरें बदे कहीं हम तोहसे ।
कुछ न जाई तोहार, तनिक संतोष हो जाई हमरें दिल कें ।
- डॉ.संतोष सिंह
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