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Hymn No. 669 | Date: 28-Jan-1999
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मेरे मौला तू ना कभी तोलना मेरे प्यार को, भुला मैं, भुला ना वो कभी तूझें ।
मेरे मौला तू ना कभी तोलना मेरे प्यार को, भुला मैं, भुला ना वो कभी तूझें ।
ना कुछ है वो जानता, वो तो सिर्फ तूझें है पुकारता अल्लाह, अल्लाह ...
लोगों नें बहुत कहॉं कुछ भी कर लें दीदार ना होता है तेरा ।
प्यार में तेरे ऐसे पड़े जीवन का सार समझतें चलें गये ।
बहुत कुछ हाथ आया दिल को चैन न भाया, जब तक तेरे दर पे ना पहुंचा ।
मेहरबानी थी तेंरी, या प्यार की जिद्द, पचड़े में ना पडू मैं, तेरा दीदार हमको हर बार हुआ।
बांध न पायेंगा कोई धरम के दीवारों में, मैं तो रंग गया हूँ प्यार के रंग में तेरे ।
नजर आयेंगी मंदिर – मस्जिद नजर न आऊँगा मैं, समा जायेगे जो दिल में तेरे ।
प्यार जो करेंगा कीसीसे कौम को भुलाकें, अनाकार को आकार में ढलतें पायेंगा।
प्यार तो दूरियाँ खत्म करता है, मजबूर कर देता है खुद को खुदा में फनाह करनें के लिये।


- डॉ.संतोष सिंह